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मेरा गांव सबसे प्यारा

मेरे गांव का नाम *आमडाढी* है,,ये छपरा जिला के एकमा प्रखंड में आता है।।

मेरे गाँव की एकता को लोग मिसाल देते है और सबसे अच्छी बात यह है कि मेरे गाँव मे जातिवाद नही होता मेरे गाँववासी उसी को समर्थन करते है जो नेक,ईमानदार और समाजसेवी हो।
मेरे गाँव के लोग हरएक के सुख-दुख में 'सरीख' होते है
हमारे गांव की एकता ऐसी है कि बाहरी कोई आंख उठाकर भी नही देखता और हमारे गांव से प्रत्येक वर्ष अधिकतम लड़के सेना में बहाल होते है।
चाहे ईद हो या दीवाली हम साथ मिलकर ही मानते है।
हमारे गांव के प्रारंभ में एक ईतीहासिक गेट(द्वार) है
आमडाढी गेट जो पूर्वजों का दिया आशीर्वाद है।।
मेरे गाँव मे कई प्राचीन् वट-पेर भी है।
मेरे गाँव मे पक्की सड़कें भी है और रोड लाइट भी है और 2,3 किमी.
पर चापाकल भी है,मेरा गांव अपने आप मे बसा एक देश है।
मेरे गाँव मे साफ-सफाई का उत्तम ढँग है चारों तरफ हरे भरे पेर,फसल से लहलहाते खेत मन को मोह लेते है।
हमारे गांव से प्राकृतिक का स्वर्णिम नजारा भी देखने को मिलता है
हमारे गांव मे खेलने के लिए 2,3 खेल मैदान भी है।
मेरे गाँव के नवीन पीढ़ी (युवा) मोबाइल गेम्स के नही बल्कि किताबों के कीड़े है, आज के परिवेश में इतना तरक्की होने के बाद भी हमारे गाँव मे गांव जैसा माहौल है यानी वही कुछ पुराने खेल(आइस पाईस,गिल्ली डंडा, दोलहा पाती,कंचे, इत्यादि) आज भी बूढ़े बाबा खेतों के मेर पर बैठकर घास गढ़ते है।
पूजा करने हेतु कई मंदिर है,,नमाज पढ़ने हेतु 2,3 मस्जिद है,,वाकई मेरे गाँव जैसा गांव शायद ही कहीं होगा और हां प्रत्येक वर्ष मेरे गांव में एक क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन होता है(महाराणा प्रताप क्रिकेट टूर्नामेंट,आमडाढी) और नित्य वर्ष विजयदशमी के दिन अखाड़ा भी निकलता है(श्री महावीरी अखाड़ा,आमडाढी) जिससे हमारे गांव का डंका सर्वत्र बजता है।
मुझे गर्व है कि मैं आमडाढी गांव का रहने वाला हूँ, मेरा गांव दोस्तों के लिए दोस्त और दुश्मनो के लिए कट्टर दुश्मन है।।

एक छोटी ही काव्य मेरे गांव पर।।

नामुमकिन है भूलना वो गांव की पुरानी बातें
सोए रातो को भी जगा देती है गांव की पुरानी यादें।।

आदर्शों से भरा पड़ा हमारा गांव
बरों को इज्जत करना सिखाया हमारा गांव।।

अनूठे संस्कृति का समागम

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